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17 साल के छात्र ने बनाया ₹5 लाख का पोर्टेबल स्कूल मॉडल, निर्माण स्थलों पर बच्चों को मिलेगी पढ़ाई की सुविधा

बेंगलुरु: पढ़ाई के लिए स्कूल तक पहुंचना हर बच्चे के लिए आसान नहीं होता। खासकर उन परिवारों के बच्चों के लिए, जिनके माता-पिता रोजगार की तलाश में एक निर्माण स्थल से दूसरे निर्माण स्थल पर जाते रहते हैं। ऐसे बच्चों की शिक्षा बीच में न छूटे, इसके लिए बेंगलुरु के 17 वर्षीय छात्र दिवित गर्ग एक अनोखी पहल पर काम कर रहे हैं।

इन्वेंचर एकेडमी में 12वीं कक्षा के छात्र दिवित गर्ग ‘द अनबॉक्स्ड स्कूल’ (The Unboxed School) नाम से एक पोर्टेबल स्कूल विकसित कर रहे हैं। यह स्कूल एक शिपिंग कंटेनर के अंदर बनाया जाएगा, जिसे जरूरत के अनुसार एक निर्माण स्थल से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकेगा।

शिपिंग कंटेनर में बनेगा चलता-फिरता स्कूल

इस परियोजना के तहत 40 फीट लंबे कंटेनर को कक्षा के रूप में तैयार किया जाएगा। इसमें एक समय में लगभग 20 से 25 बच्चों के बैठने और पढ़ने की व्यवस्था होगी। बच्चों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इसमें शौचालय और सामान रखने के लिए अलग जगह भी बनाई जाएगी।

इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि निर्माण कार्य पूरा होने या मजदूर परिवारों के दूसरी जगह चले जाने पर स्कूल को भी नए निर्माण स्थल पर पहुंचाया जा सकेगा।

प्रवासी मजदूरों के बच्चों की पढ़ाई में नहीं आएगी रुकावट

निर्माण क्षेत्र में काम करने वाले कई परिवार रोजगार के लिए लगातार अलग-अलग जगहों पर जाते रहते हैं। ऐसे में उनके बच्चों के लिए नियमित स्कूल जाना और पढ़ाई जारी रखना मुश्किल हो जाता है।

दिवित गर्ग की यह पहल इसी समस्या का समाधान तलाशने की कोशिश है। इसका उद्देश्य बच्चों के रहने और काम करने की जगह के करीब ही पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि परिवारों के स्थान बदलने के कारण उनकी शिक्षा प्रभावित न हो।

पोर्टेबल स्कूल में करीब 5 लाख रुपये आएगी लागत

‘द अनबॉक्स्ड स्कूल’ के एक यूनिट को तैयार करने में करीब 5 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस मॉडल को भविष्य में निर्माण कंपनियों, डेवलपर्स और गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) की मदद से दूसरे निर्माण स्थलों पर भी लागू किया जा सकता है।

यदि यह पहल सफल रहती है, तो यह उन बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने का एक उपयोगी मॉडल बन सकती है, जिन्हें परिवार के साथ बार-बार स्थान बदलने के कारण नियमित स्कूली शिक्षा से जुड़ने में कठिनाई होती है।

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